मुंबई, 8 सितंबर 2026: ग्रीनएक्स एनवायरनमेंटल ने आज मुंबई के ताज लैंड्स एंड, बांद्रा वेस्ट में भारत के पहले EPD सम्मेलन 2026 का आयोजन किया। सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, नियामक संस्थाओं, अंतरराष्ट्रीय EPD कार्यक्रम संचालकों, पर्यावरण एवं सस्टेनेबिलिटी विशेषज्ञों तथा भारत और दुनिया की प्रमुख विनिर्माण कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन का मकसद पर्यावरणीय पारदर्शिता और सतत विनिर्माण को लेकर बदलते वैश्विक परिदृश्य पर चर्चा करना, और भारतीय उद्योग के लिए विश्वसनीय, वैज्ञानिक व प्रमाणित पर्यावरणीय डेटा की बढ़ती अहमियत को रेखांकित करना था।
दिनभर चले इस सम्मेलन में Environmental Product Declarations (EPDs), Life Cycle Assessment (LCA) और Product Carbon Footprint (PCF) जैसे अहम विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि वैज्ञानिक और सत्यापित पर्यावरणीय डेटा के ज़रिए उद्योग अपने उत्पादों के पर्यावरणीय असर को बेहतर तरीके से माप सकते हैं, सत्यापित कर सकते हैं और पारदर्शी ढंग से लोगों के सामने रख सकते हैं।
नीति-निर्माताओं, वैश्विक विशेषज्ञों और उद्योग जगत की उल्लेखनीय भागीदारी
सम्मेलन में सरकार, नियामक संस्थाओं और उद्योग जगत के कई प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिनमें शामिल थे:
श्री सिद्धेश रामदास कदम, अध्यक्ष, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB)
रॉयल नॉर्वेजियन कॉन्सुलेट जनरल के प्रतिनिधि
पद्मश्री डॉ. मिलिंद कांबले, संस्थापक अध्यक्ष, Dalit Indian Chamber of Commerce and Industry (DICCI)
श्रीमती आरती भोसले-अहिवाले, प्रबंध निदेशक, GreenEx Environmental Pvt. Ltd.
श्री सागर अहिवाले, प्रबंध निदेशक, Green Solution Industries Pvt. Ltd.
श्री हाकोन हाउआन, CEO, EPD-NORGE तथा President & CEO, CEO Platform, Norway
श्री प्रशांत गायकवाड़, Green Solution Group of Companies
इसके अलावा नॉर्वे सहित कई देशों के अंतरराष्ट्रीय EPD कार्यक्रम संचालकों और सस्टेनेबिलिटी विशेषज्ञों ने भी सम्मेलन में हिस्सा लिया। साथ ही MPCB, BIS और NITI Aayog जैसी भारत की नियामक संस्थाओं के प्रतिनिधि, और प्रमुख भारतीय व बहुराष्ट्रीय विनिर्माण कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल हुए।
इस सम्मेलन ने अलग-अलग हितधारकों को अपने अनुभव और ज्ञान साझा करने, दुनियाभर में उभर रही नई प्रणालियों पर बात करने, और भारत में EPD को तेज़ी से अपनाने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए एक अहम मंच दिया।
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार
श्री सिद्धेश रामदास कदम, अध्यक्ष, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) ने कहा कि विश्वसनीय और पारदर्शी पर्यावरणीय डेटा भारतीय उद्योग में भरोसा मज़बूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच नियामकों, उद्योग जगत और वैश्विक सस्टेनेबिलिटी हितधारकों के बीच सहयोग मज़बूत करने के साथ-साथ व्यवसायों को मापनीय पर्यावरणीय प्रक्रियाएं अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
श्रीमती आरती भोसले-अहिवाले, प्रबंध निदेशक, GreenEx Environmental Pvt. Ltd. ने कहा कि भारत में हुआ यह पहला EPD सम्मेलन सतत विनिर्माण में पर्यावरणीय पारदर्शिता को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक अहम कदम है। LCA, विश्वसनीय डेटा और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप EPD प्रक्रियाओं के ज़रिए भारतीय कंपनियां अपने सस्टेनेबिलिटी प्रयासों को और मापनीय, पारदर्शी और वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक बना सकती हैं।
श्री सागर अहिवाले, प्रबंध निदेशक, Green Solution Industries Pvt. Ltd. ने कहा कि EPD इकोसिस्टम उद्योग को सिर्फ सस्टेनेबिलिटी के संकल्प लेने से आगे बढ़कर अपने पर्यावरणीय प्रदर्शन को मापनीय तरीके से दिखाने का मौका देता है। वैश्विक विशेषज्ञों, कार्यक्रम संचालकों और भारतीय हितधारकों को एक मंच पर लाना, सत्यापित पर्यावरणीय जानकारी को उद्योग के लिए और सुलभ व उपयोगी बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
वैश्विक मानकों से उद्योग में व्यावहारिक उपयोग तक
सम्मेलन की शुरुआत "From Transparency to Transformation: The Global Evolution of EPDs" विषय पर एक विशेष सत्र से हुई, जिसमें वैश्विक बाज़ारों में पर्यावरणीय उत्पाद पारदर्शिता की बढ़ती अहमियत और EPD की बदलती भूमिका पर चर्चा हुई।
इसके बाद EPD के मूल सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ-साथ Life Cycle Assessment (LCA), Product Carbon Footprint (PCF), और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े फ़ैसलों को ज़्यादा भरोसेमंद बनाने में EPD की भूमिका पर विस्तार से बात हुई।
सम्मेलन में EPD की पूरी प्रक्रिया भी समझाई गई — LCA मॉडलिंग और डेटा जुटाने से लेकर, मान्यता-प्राप्त वैश्विक कार्यक्रम संचालकों के ज़रिए सत्यापन और EPD के प्रकाशन तक।
विशेषज्ञों ने भारतीय कंपनियों के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी बात की, और इस बात पर ज़ोर दिया कि उद्योग, नियामक संस्थाओं, EPD कार्यक्रम संचालकों और सस्टेनेबिलिटी विशेषज्ञों के बीच सहयोग और मज़बूत होना चाहिए।
EPD-Norge/EPD Global सहित अंतरराष्ट्रीय EPD हितधारकों की भागीदारी ने सम्मेलन को एक अहम वैश्विक नज़रिया दिया, और भारतीय उद्योग को पर्यावरणीय पारदर्शिता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय बदलावों व आने वाली अपेक्षाओं को समझने का मौका मिला।
सस्टेनेबिलिटी के संकल्प से मापनीय कार्रवाई की ओर
सम्मेलन के दूसरे सत्र में इस बात पर ख़ास ज़ोर दिया गया कि सस्टेनेबिलिटी से जुड़े संकल्पों को मापनीय और प्रमाणित कार्रवाई में कैसे बदला जाए।
इस दौरान EPD Verification, Technology-enabled EPDs, और भारतीय उद्योगों के लिए सही EPD कार्यक्रम चुनने जैसे व्यावहारिक विषयों पर चर्चा हुई।
"EPD Publication Strategy – Trust, Technology and Programme Selection" विषय पर हुई एक ख़ास पैनल चर्चा में सत्यापन, सस्टेनेबिलिटी, विनिर्माण और EPD प्लेटफॉर्म से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। पैनल में इस बात पर मंथन हुआ कि कंपनियां किस तरह भरोसेमंद, मज़बूत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक Environmental Declarations तैयार कर सकती हैं।
सम्मेलन में अलग-अलग उद्योगों के EPD Case Studies भी सामने रखे गए, जिनसे यह पता चला कि कंपनियां अपनी पूरी उत्पाद मूल्य श्रृंखला में मापनीय, सत्यापित और पारदर्शी पर्यावरणीय जानकारी की दिशा में कैसे आगे बढ़ सकती हैं।
भारत में EPD अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
वैश्विक बाज़ारों में भरोसेमंद पर्यावरणीय डेटा और पारदर्शिता की बढ़ती मांग के बीच, भारत का पहला EPD सम्मेलन 2026 देश में EPD को लेकर जागरूकता और संवाद बढ़ाने की दिशा में एक अहम पहल साबित हुआ।
सम्मेलन ने भारतीय उद्योग को EPD को समझने, अपनाने और बड़े स्तर पर लागू करने के साथ-साथ, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदल रहे सस्टेनेबिलिटी मानकों और अपेक्षाओं के मुताबिक आगे बढ़ने के लिए एक साझा मंच दिया।
GreenEx Environmental के कम्युनिकेशन पार्टनर Bubble Communication ने सम्मेलन के मीडिया आउटरीच और कम्युनिकेशन की ज़िम्मेदारी संभाली, जिससे पर्यावरणीय पारदर्शिता, सतत विनिर्माण और भारत में EPD की बढ़ती अहमियत से जुड़े संवाद को ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद मिली।
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